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भूख अब भी बहुत भूखी है

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  भूख अब भी बहुत भूखी है                                                                     रामनाथ शिवेन्द्र कौन है जो नहीं जानता कि भूख क्या होती है सभी जानते हैं कि भूख जैविक अनुभूति है जो खाना खाने से संतृप्त होती है। कहा जाता है कि भूखे रहने पर भजन भी नहीं हो पाता ‘भूखे भजन न होइ गोपाला। ’ भूख एक सामाजिक व राजनीतिक बिमारी की तरह है लोग जानते हुए कि सामने रहने वाला पड़ोसी भूखा है फिर भी उसकी भूख मिटाने के लिए कोई सार्थक समाधान नहीं निकालते,े संवेदनात्मक ‘दया ’ दिखाते हुए उसे एकाध दिन खाना खिला देते हैं। इसके अलावा कुछ नहीं करते। भूखे आदमी को इस लायक बनाने का प्रयास नहीं करते कि वह आदमी भूख से लड़ सके, बिमारी से लड़ सके, विरासत में मिली गरीबी से लड़ सके। भूखे आदम...